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सोमवार, 15 फ़रवरी 2021

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड।इंदिरा गाँधी की उपज? क्या जानते हो?

आपने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का नाम तो सुना होगा, 

ट्रिपल तलाक इत्यादि के मौके पर इसका नाम कई बार टीवी पर आया, मीडिया में आया।

असल में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एक NGO है जिसका मुख्य दफ्तर दिल्ली में है।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड आज हमारी संसद और यहाँ तक की सुप्रीम कोर्ट को भी कई मौकों पर धमकी देता है।

भारत के खिलाफ जंग की धमकी, जिहाद की धमकी,हिंसा की धमकी इत्यादि और अब जो हम आपको इस संस्था के बारे में बताने जा रहे है, कदाचित आपको ये जानकारियां कहीं 
मिले ही न।

ये संगठन कब बना किसने बनाया।

वैसे आपके मन में आता होगा कि चूँकि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड है तो इसे मुसलमानो ने ही बनाया होगा।

पर अब जानिए इसकी सच्चाई

1971 आते आते इंदिरा गाँधी की लोकप्रियता बहुत घटने लगी थी, 1975 में इंदिरा गाँधी ने आपातकाल भी लगाया था।

इंदिरा गाँधी को ये देश जैसे विरासत में जवाहर लाल नेहरू से मिला था।

इंदिरा इसे अपनी जागीर समझती थी, घटती लोकप्रियता,और विपक्ष की बढ़ती लोकप्रियता से परेशान होकर,इंदिरा गाँधी ने सेक्युलर भारत में मुसलमानो के तुष्टिकरण के लिए स्वयं मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की 1971 में स्थापना की।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के लिए इंदिरा गाँधी ने विशेष नियम भी बनाया।

इस संस्था का आज तक कभी ऑडिट नहीं हुआ है, 
जबकि अन्य NGO का होता है पर इसे विशेष छूट मिली हुई है।

ये अरब के देशों से कितना पैसा पाती है, उस पैसे का क्या करती है, किसीको कुछ नहीं पता 

91% मुस्लिम महिलाएं ट्रिपल तलाक के खिलाफ है फिर भी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सुप्रीम कोर्ट को हिंसा तक की धमकी देता है।

आपको जानकरआश्चर्य होगा की 95% मुसलमान महिलाओ को तो ये भी नहीं पता की मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड असल 
में है क्या

इस NGO में केवल कट्टरपंथी मुस्लिम 
ही है।

नरेंद्र मोदी के सर पर फतवा देने वाला इमाम बरकाती भी इस NGO का सदस्य है।

जिहादी किस्म के ही लोग इस संस्था में हैं।

इस संस्था में 1 भी महिला नहीं है।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मुसलमानो का नहीं बल्कि इंदिरा गाँधी का बनाया हुआ है।

वैसे आपको एक जानकारी दे दें कि 1930 में मुस्लिम लीग को पाकिस्तान बनाने का आईडिया मुसलमानो ने नहीं बल्कि मोतीलाल नेहरू ने दिया था।

इस परिवार ने भारत का इतना नाश किया है कि आज भारत की 99% समस्या इनके कारण ही है।...

  स्तोत्र विकिपीडिया

रविवार, 14 फ़रवरी 2021

खिलाफत आंदोलन और आरएसएस। इतिहास के पन्नो से

🙏*आखिर RSS की स्थापना क्यों हुई ?*
इस प्रश्न का उत्तर पूरा पढ़िए......

*संसद में मोदी जी ने हामिद मियां पर तंज कसते हुए कहा था कि आपके परिवार के लोगों ने खिलाफत आंदोलन में भाग लिया था , जिस पर हामिद मियां खींसे निपोरते रह गए !*

तो क्या था यह खिलाफत आंदोलन? जिसे सुनते ही हामिद मियां और कांग्रेस असहज हो उठी? जानने के लिए पूरी पोस्ट को अंत तक अवश्य पढ़ें।

*खिलाफत जानने से पहले आइए पहले जरा खलीफा को जान लें, खलीफा एक अरबी शब्द है जिसे अंग्रेज़ी में Caliph (खलीफ) या अरबी भाषा मे Khalifah (खलीफा) कहा जाता है, तो कौन होता है खलीफा? 

खलीफा मुसलमानों का वह धार्मिक शासक (सुल्तान) होता है जिसे मुसलमान मुहम्मद साहब का वारिस या successor मानते हैं, खलीफा का काम होता है युद्ध कर के पूरे विश्व पर इस्लाम का निज़ाम कायम करना (जो कश्मीर में बुरहान वानी करना चाहता था), यानी इस्लाम की ऐसी हुकूमत कायम करना जिसमे इस्लामिक यानी शरीया कानून चले और जिसमे इस्लाम के अलावा किसी और धर्म की इजाज़त नही होती है, जितने हिस्से या राज्य पर खलीफा राज करता है उसे Caliphate यानी अरबी भाषा में Khilafa (खिलाफा) कहते हैं, खलीफा यानी *इस्लामिक सुल्तान* और खिलाफा यानी इस्लामिक राज्य ।

1919-22 के दौरान Turkey यानी तुर्की में ओटोमन वंश के आखिरी सुन्नी खलीफा अब्दुल हमीद-2 का खिलाफा यानी शासन चल रहा था जो कि जल्दी ही धराशाई होने वाला था, इस आखिरी इस्लामिक खिलाफा (शासन) को बचाने के लिए अब्दुल हमीद-2 ने जिहाद का आवाहन किया ताकि विश्व के मुसलमान एक हो कर इस आखिरी खिलाफा यानी इस्लामिक शासन को बचाने आगे आएं,

*पूरे विश्व मे इसकी कोई प्रतिक्रिया नही हुई सिवाए भारत के, भारत के अलावा एशिया का कोई भी दूसरा देश इस मुहिम का हिस्सा नही बना, लेकिन भारत के कुछ मुट्ठी भर मुसलमान इस मुहिम से जुड़ गए और हजारों किलोमीटर दूर , सात समंदर पार तुर्की के खिलाफा यानी इस्लामिक शासन को बचाने और अंग्रेज़ों पर दबाव बनाने निकल पड़े, जबकि इस समय भारत खुद गुलाम था और अपनी आजादी के लिए संघर्ष कर रहा था, लेकिन अंतः 1922 में तुर्की से सुलतान के इस्लामिक शासन को उखाड़ फेंका गया और वहाँ सेक्युलर लोकतंत्र राज्य की स्थापना हुई और कट्टर मुसलमानों का पूरे विश्व पर राज करने का सपना टूट गया, इसी सपने को संजोए आजकल ISIS काम कर रहा है ।*

भारत के चंद मुसलमानों ने अंग्रेज़ी हुकूमत पर दबाव बनाने के लिए बाकायदा एक आंदोलन खड़ा किया , जिसका नाम था खिलाफा आंदोलन (Caliphate movement) अब क्योंकि अंग्रेज़ी में लिखे जाने पर इसका हिन्दी उच्चारण खलिफत होता है (अरबी में caliphate को khilafa=खिलाफा लिखते है) तो *कांग्रेस ने बड़ी ही चतुराई से इसका नाम खिलाफत आंदोलन रख दिया ताकि देश की जनता को मूर्ख बनाया जा सके और लोगों को लगे कि यह खिलाफत आंदोलन अंग्रेज़ो के खिलाफ है, जबकि इसका असल मकसद purely religious यानी पूर्णतः धार्मिक था, इसका भारत की आज़ादी या उसके आंदोलन से कोई लेना देना नही था,*

कुछ समझ मे आया? कैसे शब्दों की बाज़ीगरी से जनता को मूर्ख बनाया जा रहा था, कैसे खलिफत को खिलाफत बताया जा रहा था, (ठीक वैसे ही जैसे Feroze Khan Ghandi (घांदी) को Feroze Gandhi (फ़िरोज़ गांधी) बना दिया गया) ।

*उस समय भारत मे इतने पढ़े लिखे लोग और नेता नही थे कि गांधी नेहरू की इस चाल को समझ सकें, लेकिन इन सब के बीच कांग्रेस में एक पढ़ा लिखा व्यक्तित्व उपस्थित था , जिनका नाम था डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार था ! इन्होंने इस आंदोलन का जम कर विरोध किया , क्योंकि खिलाफा सिर्फ तुर्की तक सीमित नही रहना था, इसका उद्देश्य तो पूरे विश्व पर इस्लाम की हुकूमत कायम करना था जिसमे गज़वा-ए-हिन्द यानी भारत भी शामिल था !*
*डॉ हेगड़ेवार ने कांग्रेस के गांधी और नेहरू को बहुत समझने की कोशिश की , लेकिन वे नही माने, अंतः डॉ हेगड़ेवार ने कांग्रेस के इस खिलाफत आंदोलन का विरोध किया और कांग्रेस छोड़ दी !*

तो अब समझ मे आया मित्रों की कांग्रेसी जो कहते हैं कि RSS ने आज़ादी के आंदोलन का विरोध किया था, तो वो असल मे किस आंदोलन का विरोध था? आप डॉ हेगड़ेवार के स्थान पर होते तो क्या करते? क्या आप भारत को गज़वा-ए-हिन्द यानी इस्लामिक देश बनते देखते? या फिर डॉ साहब की भांति इसका विरोध करते?

*1919 में खिलाफत आंदोलन शुरू हुआ था और 1920 में डॉ हेगड़ेवार ने कांग्रेस छोड़ दी और सभी को इस आंदोलन के बारे में जागरूक किया कि इस आंदोलन का भारत की स्वतंत्रता से कोई लेना देना नही है और यह एक इस्लामिक आंदोलन है ! जिसका परिणाम यह हुआ कि यह आंदोलन बुरी तरह फ्लॉप हुआ ! और 1922 में अंतिम इस्लामिक हुकूमत धराशाई हो गयी !*
मुस्लिम नेता इस से बौखला गए और मन ही मन हिन्दुओ और संघ को अपना शत्रु मानने लगे और इसका बदला उन्होंने 1922-23 में केरल के मालाबार में हिन्दुओ पर हमला कर के लिया ! 

और असहाय अनभिज्ञ हिन्दुओ को बेरहमी से काटा गया , हिन्दू लड़कियों की इज़्ज़त लूटी गई, जबकि इस आंदोलन का भारत या उसके पड़ोसी देशों तक से कोई लेना देना नही था ।

*1923 के दंगों में गांधी ने हिन्दुओ को ही दोषी ठहराते हुए हिन्दुओ को कायर और बुजदिल कहा था, गांधी ने कहा हिन्दू अपनी कायरता के लिए मुसलमानों को दोषी ठहरा रहे हैं, अगर हिन्दू अपने जान माल की सुरक्षा नही कर सकता , तो इसमें मुसलमानों का क्या दोष?

 हिन्दुओ की औरतों की इज़्ज़त लूटी जाती है तो इसमें हिन्दू दोषी है, कहां थे उसके रिश्तेदार जब उस लड़की की इज़्ज़त लूटी जा रही थी? कुलमिला कर गांधी ने सारा दोष दंगा प्रभावित हिन्दुओ पर मढ़ दिया और कहा कि उन्हें हिन्दू होने पर शर्म आती है, जब हिन्दू कायर होगा तो मुसलमान उस पर अत्याचार करेगा ही ।*

डॉ हेगड़ेवार को अब समझ आ चुका था कि सत्ता के भूखे भेड़िये भारत की जनता की बलि देने से नही चूकेंगे, इसलिए उन्होंने हिन्दुओ की रक्षा और उनको एकजुट करने के उद्देश्य से तत्काल एक नया संगठन बनाने का काम प्रारंभ कर दिया और अंततः 1925 में संघ (RSS) की स्थापना हुई !

*आज अगर हम होली और दीवाली मानते हैं, आज अगर हम हिन्दू हैं , तो केवल उसी खिलाफत आंदोलन के विरोध और संघ की स्थापना की कारण , अन्यथा तो जाने कब का गज़वा-ए-हिन्द बन चुक होता ।*

गुरुवार, 11 फ़रवरी 2021

हिन्दुसंस्कृति के 24000 साल पुराने सबूत

जो लोग हिन्दू संस्कृति को जानते नहीं, या सनातन संस्कृति को जानते नहीं, जिन्हें हिन्दू सभ्यता महज कोरी कल्पना लगती है, ओ लोग ये वीडियो एक बार जरूर देख ले। साइंटिफिक स्टडी 25 साल करने के बाद

1950 -2002 तक आरएसएस तिरंगा क्यो नही फहराता था?

*क्या आप जानते हैं कि RSS ने ५२ वर्षों तक भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा नही फहराया ?*

*जी हां ये सच है कि १९५० से २००२ तक RSS ने तिरंगा नहीं फहराया!*

*तो इस राष्ट्रीय ध्वज के न फहराने का सच क्या है ?* 

*आइये जानते हैं-*

*ऐसा क्या हुआ कि १९५० के बाद RSS ने तिरंगा फहराना बंद कर दिया ?* 

*स्वतंत्रता के बाद संघ की शक्ति लगातार बढ़ती जा रही थी! और संघ ने राष्ट्रीय पर्व जैसे १५ अगस्त और २६ जनवरी जोर-शोर से मनाने आरंभ कर दिए थे!* 

*आम जनता ने भी इसमें बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेना आरंभ कर दिया! इससे नेहरू को अपना सिंहासन डोलता नज़र आया, और बड़ी ही चालाकी से उन्होंने भारत के संविधान में एक अध्याय जुड़वा दिया- "National Flag Code"!*

*नेशनल फ्लैग कोड को संविधान की अन्य धाराओं के साथ १९५० में लागू कर दिया गया! और इसी के साथ "तिरंगा फहराना" अपराध की श्रेणी में आ गया!* 

*इस नियम के लागू होने के बाद राष्ट्रीय ध्वज केवल सरकारी भवनों पर, कुछ विशेष लोगों द्वारा ही फहराया जा सकता था! और यदि कोई व्यक्ति इसका उल्लंघन करता है, तो उसे सश्रम कारावास की सज़ा का प्रावधान था!*

*अर्थात, नियम के अनुसार, राष्ट्रीय ध्वज अब संघ की शाखाओं में नहीं फहराया जा सकता था, क्यों कि वे सरकारी भवन न होकर, निजी स्थान थे! संघ ने नियम का पालन किया, और तिरंगा फहराना बंद कर दिया!*

*यह नियम नेहरू के डर के कारण बनाया गया था!  वरना इसका कोई औचित्य नहीं था! क्यों कि स्वतंत्रता की लड़ाई में तो प्रत्येक आम आदमी तिरंगा हाथ में लेकर सड़कों पर होता था!*

*परन्तु अचानक उसी आम आदमी और समस्त भारत की जनता से उनके देश के  को फहराने का अधिकार छीन लिया गया! और जिस तिरंगे के लिए लाखों नागरिक बलिदान हो गए, वह तिरंगा फहराने का अधिकार अब केवल नेहरू-गांधी परिवार की संपत्ति बन चुका था!*

*कांग्रेस के सांसद (Member of Parliament) नवीन जिंदल ने अपनी फैक्ट्री 'जिंदल विजयनगर स्टील्स' में तिरंगा फहराया, तो उनके विरुद्ध FIR दर्ज करने के बाद, उन्हें गिरफ्तार किया गया!*

*इसके बाद उन्होंने न्यायालयों में लंबी लड़ाई लड़ी, और २००२ में उच्च न्यायालय ने यह आदेश घोषित किया, कि भारत का ध्वज प्रत्येक नागरिक फहरा सकता है! अपने निजी भवन पर भी फहरा सकता है! बशर्ते वे राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान का ध्यान रखें, और तिरंगे को Flag Code के अनुसार फहराए!*

*इसके बाद से आज तक निरंतर संघ की हर शाखा में तिरंगा फहराया जा रहा है!*

*है कोई कांग्रेसी, वामपंथी या आपिया जो इन तथ्यों को झुठला सके ?* 

*आज वही कांग्रेसी प्रश्न उठा रहे हैं! जो राष्ट्रगान के समय कुर्सी से उठते भी नहीं, बैठे रहते हैं, वे प्रश्न उठाते हैं!*

*आपको गूगल पर कई कांग्रेसी मुल्लों और वामपंथियों के ब्लॉग मिल जाएंगे, जिसमें तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया होगा। ओर आपसे सवाल पूछा गया होगा? के आरएसएस तिरंगा क्यो नही फहराते?!*

*परन्तु हर जगह एक बात जरूर मिलेगी, कि १९५० से पहले, और २००२ के बाद, संघ तिरंगा फहराता आ रहा है!*

*तो आज आपको पता चला कि तिरंगे का असली दोषी कौन था!*

*प्रश्न यह है कि आखिर भारतीयों से उनके अपने ही देश का ध्वज क्यो छीन लिया गया ?* 

*इस बात को आगे बढ़ाएं, सब तक पहुंचायें!*

*इस पोस्ट को निर्भीक होकर कॉपी, पेस्ट, शेयर कीजिये!*

*वंदे मातरम्!*

*भारत माता की जय!*
Making india

2030 के बाद का भारत

*2030 के बाद का भारत, मोदी सरकार की आज की प्लानिंग*


 कुछ समय के बाद, कार की मरम्मत कार्यशालाओं को बंद कर दिया जाएगा।

 एक पेट्रोल या डीजल कार में लगभग 20,000 छोटे हिस्से होते हैं जबकि एक इलेक्ट्रिक वाहन में 50 से कम हिस्से होते हैं।
 भविष्य में, इलेक्ट्रिक कारों को जीवन के लिए गारंटी दी जाएगी।  इसके अलावा, बैटरी से चलने वाले वाहनों को इलेक्ट्रिक मोटर को बदलने में केवल कुछ मिनट लगेंगे

  बिजली की मोटरों को टूटने के बाद नियमित वर्कशॉप में रिपेयर नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें रोबोटिक वर्कशॉप में रिपेयर किया जाएगा।

 यदि आपका इलेक्ट्रिक वाहन टूट जाता है, तो एक दीपक लगातार चालू रहेगा।  वे आपकी कार को वर्कशॉप में ले जाएंगे और आपकी चाय पीने के बाद, मरम्मत की गई इलेक्ट्रिक कार बाहर आ जाएगी !!!

 पेट्रोल पंप नहीं होंगे।

 देश के हर रास्ते  के चौक पर बैटरी चार्ज करने के लिए दुकानें होंगी।  इसकी शुरुआत यूरोप के कुछ देशों में हुई है।

 स्मार्ट निर्माताओं, जैसे होंडा, टोयोटा, सैमसंग, ने इलेक्ट्रिक कार बनाने में अरबों डॉलर का निवेश किया है।

कोयला खदानें पूरी तरह से बंद हो जाएंगी।  पेट्रोल कंपनियां बंद करेंगी  साथ ही, भूमिगत तेल निकासी को रोक दिया जाएगा।  इसका मतलब है कि मध्य पूर्वखाड़ी के देश खतरे में है।  अरबों को एक बार फिर सिर्फ खजूर खाना होगा।

  घर में स्थापित सौर ऊर्जा से चलने वाली बिजली से बहुत सी बिजली प्राप्त की जाएगी।  इसे बिजली कंपनी को संग्रहीत और बेचा जा सकता है।  उस बिजली का उपयोग उच्च बिजली कंपनियां कर सकती हैं।  साथ ही, आपको बिजली का बिल भी नहीं मिलेगा।

 निजी कारें केवल संग्रहालय में दिखाई देंगी।  तेजी से नष्ट होने वाला भविष्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

 वर्ष २००० में, ऐसा नहीं लगता था कि पांच साल बाद, कोई भी फोटो रोल पर फोटो नहीं लेगा।  अब, बीस साल बाद, केवल स्मार्ट फोन पर तस्वीरें ली जा रही हैं।  केवल विशेषज्ञों ने एक बड़ा कैमरा पास में रखा।

  डिजिटल कैमरा का आविष्कार 1975 में हुआ था।  उस समय इसका रेजोल्यूशन केवल दस हजार पिक्सल था।  यह अब 100 मेगापिक्सल है।  और भविष्य की सभी प्रौद्योगिकी समान उड़ानें लेने जा रही हैं।

  अब से, कृत्रिम बुद्धि अधिक से अधिक तेजी से सुधरेगी।  यह चिकित्सा उपकरणों को समझदार और निदान करने में आसान बना देगा।  इलेक्ट्रिक कारें अपने आप चलेंगी।  ड्राइवर की आवश्यकता नहीं है।  सारी सीख कंप्यूटर पर होगी।  कृषि विज्ञान में 3 डी प्रिंटिंग और भारी प्रगति होगी।

 पुराने ज़माने के उपन्यास "फ्यूचर शॉक" को भूल जाओ।  चौथी औद्योगिक क्रांति आ रही है।  इसमें क्या होने वाला है?

 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन मानव उद्योग, 3 डी प्रिंटिंग, सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक प्लेन, लंबी दूरी की बसों के बजाय इलेक्ट्रिक ड्रोन, सभी के लिए मुफ्त बिजली !!  मुफ्त बिजली प्लास्टिक को नष्ट कर सकती है, शायद प्लास्टिक को बदलने की तकनीक भी!  और क्या  बस कल्पना करते रहो !!

  2040 तक, इलेक्ट्रिक वाहन आम हो जाएंगे।  इसके माध्यम से यात्रा मुफ्त और सस्ती होगी।  इसलिए निजी वाहन नहीं होंगे।  तो कोई प्रदूषण नहीं।  वाहनों के लिए पार्किंग स्थल भी नहीं होगा।

  चूंकि सभी वाहन इलेक्ट्रिक हैं, इसलिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण साफ रहेगा, जहां प्रदूषण नहीं होगा।  स्वच्छ वायु होगी, स्वच्छ जल होगा।  चूंकि बिजली मुफ्त है, इसलिए प्लास्टिक कचरा नहीं होगा और इसे जलाया जाएगा।  क्योंकि इसमें कुछ खर्च नहीं होगा।  शारीरिक फिटनेस के लिए केवल साइकिल उपलब्ध होगी।  ऊंची इमारत में 24 घंटे लिफ्ट होगी।

 ऊर्जा के लिए दो स्रोत होंगे। एक वह सौर ऊर्जा है जो कभी खत्म नहीं होगी। सौर ऊर्जा पर पैनल सस्ता और अधिक शक्तिशाली हो जाएगा क्योंकि इसमें लगातार सुधार हो रहा है।  इसके अलावा, जैसे-जैसे बैटरी में सुधार होता जाता है, वैसे-वैसे उनमें संग्रहीत बिजली की मात्रा बढ़ती जाएगी, जो परिवार की किसी भी ज़रूरत से ज़्यादा होती है।

 एक अन्य स्रोत है: रिएक्टरों में प्रयुक्त परमाणु ईंधन।  अब नए शोध से बिजली पैदा करना संभव होगा।  यह बिजली सभी को एक और * पांच साल * में मिलेगी।  उस पर बनने वाली बैटरी लाइफ होगी ---- २ .... हजार साल .... हशश !!

 स्वास्थ्य - मोबाइल फोन की बैटरी जीवन भर चलेगी।  यह अधिक सेंसर के साथ भी आएगा, जो आपको अपनी शारीरिक फिटनेस के बारे में पूरी जानकारी देगा।  उसके आधार पर, हम एक चिकित्सा विशेषज्ञ से परामर्श कर सकते हैं।
 *एक नई दुनिया में आपका स्वागत है।*

English:-
* India after 2030, Modi government's planning today *


  After some time, the car repair workshops will be closed.

  A petrol or diesel car has around 20,000 small parts while an electric vehicle has less than 50 parts.
  In the future, electric cars will be guaranteed for life.  In addition, battery-powered vehicles will only take a few minutes to replace the electric motor

   Electric motors will not be repaired in regular workshops after breakdown, rather they will be repaired in robotic workshops.

  If your electric vehicle breaks down, a lamp will be on continuously.  They will take your car to the workshop and after drinking your tea, the repaired electric car will come out !!!

  There will be no petrol pumps.

  There will be shops for charging batteries at all the sidewalks of the country.  It has originated in some countries of Europe.

  Smart manufacturers, such as Honda, Toyota, Samsung, have invested billions of dollars in producing electric cars.

 Coal mines will be completely closed.  Petrol companies will stop as well, underground oil extraction will be stopped.  This means that the countries of the Middle East are in danger.  The Arabs will once again have to eat only dates.

   A lot of electricity will be obtained from solar powered electricity installed in the home.  It can be stored and sold to the electricity company.  High power companies can use that power.  Also, you will not get electricity bill.

  Private cars will only be visible in the museum.  The fast-destroying future is advancing rapidly.

  In the year 2000, it did not seem that after five years, no one would take a photo on a photo roll.  Now, twenty years later, pictures are being taken only on smart phones.  Only the experts placed a large camera nearby.

   The digital camera was invented in 1975.  At that time its resolution was only ten thousand pixels.  It is now 100 megapixels.  And all future technology is going to take similar flights.

   From now on, artificial intelligence will improve more and more rapidly.  This will make medical devices smarter and easier to diagnose.  Electric cars will run on their own.  No driver required.  All learning will be on computer.  There will be 3D printing and huge progress in agricultural science.

  Forget the old novel "Future Shock".  The fourth industrial revolution is coming.  What is going to happen in it?

  Artificial intelligence, machine human industry, 3D printing, solar power, electric plane, electric drones instead of long distance buses, free electricity for all !!  Free electricity can destroy plastic, perhaps even technology to replace plastic!  And what just keep imagining !!

   By 2040, electric vehicles will become common.  Travel through it will be free and affordable.  Therefore there will not be private vehicles.  So no pollution.  There will also be no parking lot for vehicles.

   Since all vehicles are electric, the environment will be clean in urban and rural areas, where there will be no pollution.  There will be clean air, clean water.  Since electricity is free, the plastic will not be garbage and will be burned.  Because it won't cost anything.  Only bicycles will be available for physical fitness.  The tall building will have a 24-hour lift.

  There will be two sources for energy.  One is the solar energy that will never end.  The panel on solar power will become cheaper and more powerful as it is constantly improving.  In addition, as the batteries improve, the amount of electricity stored in them will increase, which is more than any family needs.

  Another source is: nuclear fuel used in reactors.  Now it will be possible to generate electricity through new research.  Everyone will get this electricity in another * five years *.  The battery life that will be built on it will be… 2… thousand years….

  Health - Mobile phone batteries will last a lifetime.  It will also come with more sensors, which will give you complete information about your physical fitness.  Based on that, we can consult a medical expert.
 *Welcome to a new world.*

बुधवार, 10 फ़रवरी 2021

डॉ गोवर्धन जोधपुर,राजस्थान। चमत्कार।

जोधपूरमधील त्या ‘दोन अंगठ्याची’ कमाल
मान, पाठ, कंबर यावर उपचार करणारे जादूगार

मधुकर भावे 

आॅगस्ट-सप्टेंबर २०२० च्या दोन महिन्यात माझी स्व.पत्नी मंगला तिची प्रकृती गंभीर झाल्यामुळे पिंपरी-चिंचवड येथील डॉ.डी.वाय.पाटील रुग्णालयात दाखल होती. त्या संस्थेचे प्रमुख डॉ.पी.डी.पाटील यांच्या तत्परतेने मंगलावर सुयोग्य उपचार चालू होते. या काळात किमान २०-२२ वेळा मुंबई-पिंपरी-चिंचवड अशा खेपा होत होत्या. पत्नीच्या आजारात या प्रवासाचा एक विपरीत परिणाम माझ्या कमरेच्या हाडांवर कधी झाला ते मला कळलेच नाही. कंबर दुखू लागली, पायापर्यंत चमक मारु लागली. मंगलाच्या आजारपणामुळे माझ दुखण महत्वाच नव्हतं, त्यामुळे ते अंगावर काढल. त्यानंतर चालण असह्य झालं. म्हणून प्रथम डॉ.सुबोध मेहता मग डॉक्टर कपिल अशा नामवंत वैद्यक शास्त्र्यांकडून तपासणी झाली, एम.आर.आय झाला, इंजेक्शन झाली, गोळ्या सुरु झाल्या. चालता येईना, दुखण थांबेना. वेदना असह्य झाल्यावर आणि दुखण बर होत नाही अस जाणवल्यावर निराशा येत गेली त्यातच मंगलाचे हृदयविकाराच्या तीव्र झटक्याने निधन झाले, निराशेत आणखी भर पडली. काय उपचार करावे सुचत नव्हते, डॉक्टरांनी मणक्याचे आॅपरेशन सुचवले, पण ते करणे धोक्याचे आहे, असे त्यांनीच मत दिले. आता काय करायचे?.. काही प्रश्नांची उत्तर नियती देत असते. एक दिवस अचानक माझे दोन मित्र श्री. किशोर अग्रहाळकर (नवी मुंबईचे माजी नगररचनाकार) आणि श्री. अशोक मुन्शी माझ्याकडे आले. माझ दुखण पाहून त्यांनी सुचवलं की, ‘जोधपुरला चला’ असं सांगायलाच आलो आहोत. दोन्ही जिव्हाळ्याचे मित्र. जोधपूरला उपाय काय माहित नाही, त्यांच्यावर विश्वास ठेऊन जोधपूरला जायचं ठरले. त्यांनी सांगितले की, डॉ. गोवर्धनलाल पाराशर हे विख्यात डॉक्टर दोन अंगठयांनी कंबर, मणका, मान, पाय याठिकाणी ज्या मांसपेशीमध्ये शीर दबलेली असते तिला बरोबर मार्गी लावतात आणि अवघी दहा मिनीटाची त्यांची जादू. करुन तर बघा.... चार डॉक्टर झाले होते, चार प्रयोग झाले होते. पाचवा प्रयोग करु या, असं समजून जोधपूरला निघालो, सोबत माझी सुविद्य कन्या डॉ. मृदूला (एम.एस. एफ.आर.सी.एस) हीसुध्दा होती. विमानात बसताना पायंड्या चढता आल्या नाहीत. व्हिलचेअरवरुन आत जावे लागले. उतरताना व्हिलचेअरची गरज लागली.... पुढे काय होणार माहित नव्हते. ४० मिनीटात
डॉ. पराशर यांच्या ‘आॅस्टियोपॅथी’ प्रयोगासाठी त्यांच्यासमोर उभा राहीलो. त्यांनी उपचार सुरु केले. त्यांच्या रुग्णालयात सकाळी ८ वाजल्यापासून संध्याकाळी ५ पर्यंत रोज ३०० लोकांवर, या सर्व व्याधींवर उपचार केले जातात. त्यांचे बंधू डॉक्टर नंदु, ज्येष्ठ चिरंजीव डॉ. गिरीराज, दुसरे चिरंजीव डॉ.महेश आणि अन्य डॉक्टर सहकारी अशा १२ जणांची टीम ३०० रुग्णांवर पाचवाजेपर्यंत उपचार करते. जे रुग्ण लंगडत आलेले असतात, ज्या रुग्णांना कमरेला विळखा घालून उचलून आणलेले असते... अशा अनेक व्याधी असलेले रुग्ण जवळपास रडत रडतच येतात आणि १० मिनीटाच्या उपचारानंतर टकाटक चालत, हसत आनंदाने परतताना दिसतात, ते सर्व मी बघत होतो. डॉक्टर गोवर्धनजी मला म्हणाले ‘आपका तो कुछ भी नही है। दो दिन मे ठीक होके मुंबई जाओगे।...’ मी ऐकत होतो. पाचवा प्रयोग आहे असच म्हणत होतो. डॉक्टरांच्या सोबत उपचाराच्या खोलीत गेलो. एका रुंद टेबलावर त्यांनी झोपवलं. दोन अंगठयांनी मणक्याची शीर दाबायला सुरुवात करुन कमरेपर्यंत दोन अंगठ्यात दुखरी शीर पकडत ते खालपर्यंत येत होते, पुन्हा वर जात होते... मला फरक जाणवू लागला. पायापर्यंत जाणारी चमक पहिल्या पाच मिनीटात कमी झाल्याच जाणवलं. पुढच्या पाच मिनिटानंतर डॉक्टर म्हणाले, ‘चलो उठो.... आप खुद चल के जा सकते हो।’... मी टेबलवरुन खाली उतरलो. माझी पावलं ताड-ताड पडू लागली. काय झालयं मलाच समजेना आवाजात एकदम फरक पडला, उत्साहात फरक पडला.  नियती काय घडवतं असते. त्याचा अनुभव करत होतो.  डॉक्टरसाहेबांजवळ येऊन बसलो.... कैसा महसूस कर रहे हो।... त्यांच्या प्रश्नावर इतकच म्हणालो की, ‘विश्वास बसत नाही असं काही तरी घडलं आहे. पुराणामध्ये एक कथा आहे की, भगवान श्रीकृष्णांन एका करंगळीवर अख्खा गोवर्धन पर्वत उचलला होता... मोठी रोचक कथा आहे. त्याचे मित्र असलेले पेंदे काठ्या टेकून उभे होते, पर्वत उचलला होता श्रीकृष्णाच्या करंगळीवर , ते बघायला कुणीच गेल नाही. पण माझ्या समोरच्या डॉक्टरांनी हाताच्या दोन अंगठयांवर हजारो रुग्णांची व्यथा आणि पिडा गोवर्धन पर्वतासारखीच उचलली आणि त्यांची पिडा दूर केली. विलक्षण योगायोग म्हणजे त्या वैद्यकशास्त्राच नाव डॉक्टर गोवर्धनच आहे. अंगठयाची कमाल आहे. सेवेची आणि ‘आॅस्टियोपॅथीच्या अभ्यासाची ही साधना आहे.
डॉक्टरांनी एक पुस्तक हातात दिलं. उलटून बघितलं, विश्वास बसला नसता. फोटोसकट सगळी सचित्र माहिती होती. मान, पाठ, मणका, पोटºया एवढेच नव्हेतर हाताची एकमेकांवर चढलेली बोटं अशा अनंत व्याधी घेऊन डॉक्टरसाहेबांकडे कोणकोण आले आणि हे जागतिक किर्तीचे लोक अंगठयाच्या जादूने बरे होऊन गेले. त्यांनी कोणत्या कोणत्या शब्दात डॉक्टरांचं वर्णन कसं केलं... सगळ वाचून थक्क झाले. या उपचारामध्ये आहेत, भारताच्या माजी पंतप्रधान इंदिरा गांधी, अमेरिकेचे माजी राष्टÑपती डॉ. जॉर्ज बुश, बराक ओबामा, भारताचे माजी राष्टÑपती डॉ. अब्दुल कलाम, प्रतिभाताई पाटील, पंतप्रधान अटलबिहारी वाजपेयी, गुजरातचे त्यावेळचे मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, आजचे राजस्थानचे मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत, सिनेतारकांमध्ये देवानंद, राजेश खन्ना, धर्मेद्र, मिथुन चक्रवर्ती, सलमान खान, सनी देओल आणि शेवटची दोन नाव.... लता मंगेशकर आणि सचिन तेंडुलकर या सर्वांचे या ना त्या रुपात डॉक्टरांनी उपचार केलेले आहेत आणि त्या सर्वांच्या व्याधी दूर केलेल्या आहेत. मध्यप्रदेशचे माजी मुख््यमंत्रीु अर्जुनसिंग चक्क सहा दिवस दाखलच झाले होते. या महारथींच्यापेक्षा सुध्दा सकाळी ८ ते  संध्याकाळी ५ वाजेपर्यंत जी सामान्य माणसं येतात त्यांच्या चेहºयावरचा आनंद विलक्षण आहे आणि प्रत्येकाची फी फक्त रुपये १००/-....
आणखी एका किस्सा सांगतो. ख्यातनाम उद्योगपती मुकेश अंबानी यांच्या मातोश्री श्रीमती कोकिलाबेन अंबानी यांच्या उपचारासाठी त्यांना जोधपुरात आणलं होतं. तो योग साधून त्यांचा वाढदिवस मुकेशजींनी जोधपूरमध्ये साजरा केला. ४०० मित्रांना वाढदिवसाला बोलावलं, १० चॅटर्ड विमान आणली, सगळी फाईव्हस्टार हॉटेल्स बुक केली, ५ कोटी रुपये खर्च केला म्हणतात आणि नंतर डॉक्टर गोवर्धनलालजींना ते म्हणाले, ‘मी मुंबईमध्ये ५-२५ कोटी रुपये लावून तुमच्या उपचारांसाठी फाईव्हस्टार रुग्णालय उभं करतो, तुम्ही तिथे या. मला डॉक्टर गोवर्धनलाल यांची विशेषता यातच वाटते की, त्यांनी काय सांगितलं?..
‘मुकेशभाई, आपका वह सेंटर तो फाईव्हस्टार हॉटेलसेभी उपर के लेवलका होगा, जाहीर है की ऐसे संस्थानमे मै गरीब तो क्या, मध्यमवर्ग का आदमी भी पहुंच नही सकता, मै विनम्रतापूर्वक इसे स्वीकार नही कर सकता, क्योंकी, जहा, गरीब रुग्ण की मेरे हाथसे सेवा नही हो सकती ऐसे हेल्थकेअर सेंटर मे  मेरी विद्या किस काम की?....’
डॉक्टर गोवर्धनलाल पराशर यांची प्रखर मानसिकता, त्यांची उच्च विचारसरणी, व्यावसायाची निष्ठा आणि सामाजिक धाडस या सर्व गोष्टीचा परिचय त्या एकाच घटनेत होऊ शकतो.
सहा दिवस उपचार घेतले, आज मी टकाटक पूर्वीप्रमाणे झपाटून कामाला लागलो आहे. जगात १६०० कोेटी लोक राहतात, त्यांचे ३२०० कोेटी अंगठे आहेत पण जोधपूरमधले डॉक्टर गोवर्धनलाल पाराशर यांचे दोन अंगठे जगातल्या ३२०० कोटी अंगठयांपेक्षा वेगळे अंगठे आहेत. ‘अंगठा दाखवला’ असा मराठीतला वाकप्रचार फार वाईट अर्थाने वापरला जातो. जोधपूरले हे दोन अंगठे कमाल करणारे अंगठे आहेत. मी मुंबईला परत निघताना डॉक्टरसाहेबांना सांगितलं की,....
‘डॉक्टरसाहब, आपका तहेदिलसे ऋणी हू। आज मुंबई जा रहा हू। जोधपूर के दोन अंगुठे का डंका मुंबई आणि पुरे महाराष्टÑ मे बजानेकी मेरी जिम्मेदारी, आप से मेरा इतनाही वादा....’
मुंबईला आल्यावर अनेक महिने थांबलेला व्यायाम पूर्ववत सुरु केला आहे. मंगलाच्या निधनाने दु:ख पचवून पुन्हा कामाला सुरुवात केली आहे. डॉक्टर गोवर्धन यांची ही यशस्वी गाथा महाराष्टÑभर सामान्य माणसाला उपयोगी पडेल यासाठी मुंबई, पुणे, नागपूर या दोन-तीन ठिकाणी डॉ. पाराशर यांची आरोग्य शिबीरे आयोजित करण्याचे काम सुरु केले आहे. नियती या कामात यश देते की नाही ते पाहूया..

Address: Shree Sanwar Lal Osteopath charitable sansthan 18 E, Chopasni Housing Board, Jodhpur, Rajasthan 342008

Phone: 0291 297 2777

भारत की राजनीति 1947 से 2021

कृषि कानून शरद पवार की राष्ट्रवादी पार्टी, ओर कोंग्रेस पार्टी 2006 से यही कृषि कानून लाना चाहते थे पूरे भारत मे, ओर तब पंजाब की सरकार, भी यही चाहती थी। पर जो काम हम 10 साल में सत्ता में रहकर नही कर पाए, ओ काम मोदी ने किसानों के लिए कर दिया, एक झटके में। ये एक ऐतिहासिक बिल है, जिससे किसान की आर्थिक हालात बदल जाएंगे, पर इसका क्रेडिड हम मोदी को काभि नही लेने देंगे। और हमारा नशीब अच्छा है, टिकेत, केजरीवाल, ममता, जैसे दोगले हमारे साथ है। भले ही हम पूरे भारत के किसानों को बेवकूफ न बना पाए, पर हमें पंजाब के आढ़तिये मिल ही गए। तो हम ये मौका क्यो छोड़े? ये है देशद्रोही राजनीति। देश जाए भाड़ में, पर हम चाहते है के हमारे परिवार अगले 70 साल इस देश पर राज करे। हम लोगो ने, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, चंद्रशेखर आझाद, भगतसिंग, सरदार वल्लभभाई पटेल, वीर सावरकर जैसे देशभक्तों का नामो निशान मिटा दिया इस देश से, यँहा तक के हमने महात्मा गाँधी को आझादी मिलते ही 6 महीने में निपटा दिया, ओर उनके खानदान का भी नामोनिशान मिटा दिया, तो मोदी क्या चीज है। बस भारत की जनता 2014 के बाद ज्यादया होशियार ओर देशभक्त हो गयी है। ये असली समस्या है। पर हम अब भी नही हारे। महाराष्ट्र के हिन्दू के शेर बालासाहेब ठाकरे के बेटे को हम गिधड़ बना सकते है, ओर उनकी शिवसेना खत्म कर दी, तो बीजेपी कौनसी बड़ी बात है। 70 साल से हमने इतना धन जमा कर रखा है, विदेशों में, के हम ओर 10 सालमें इस देश को तोड़ सकते है। हमे पहले भी काभि फ़र्क नही पड़ा, के पाकिस्थान हमारे भारत के हर राज्य में कितने लोगों को मारता है, या चीन कितने भूमि पर कब्जा करता है। या कश्मीर में मार मार कर हिन्दू खत्म किये जाते है, या देश की सेना बिना बुलेट प्रूफ जैकेट के मरती है,, या बॉर्डर पर बर्फ में दबकर मरे, या केदारनाथ जैसे आपदा में मरे, या भोपाल के गैस कांड में मरे, या लोकल ट्रेन में बम फटने से मरे। हमे बस एक ही ध्यान रहता है, जैसे हमने ओर हमारे परिवार ने 70 साल राज किया, उसी तरह हमारे अगली पीढियां 700 साल राज्य करे। फिर इसके लिए लाखों करोड़ों किसान आत्महत्या कर ले, या हिन्दू मुस्लिम आपस मे एक दूसरे को काटते फिर। 1947 में भी इसी तरह 30 लाख हिन्दू -मुस्लिम आपस मे कट कर मरे, पर हमारे परिवार को खरोच तक नही आयी। ये राजनीति है, ओर राज करने का अधिकार केवल ओर केवल, हमारे मतलब, शरद, राहुल, ममता,लालू, के परिवार को ही है। ये हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है, ओर हम इसे वापस लाकर ही रहेंगे। इस देश मे पहले भी राजाओं और मोगलों के नवाबों का राज रहा है। अब आगे भी हमारा ओर हमारे परिवार का ही रहेगा।क्यो की भले ही भारत की जनता हमारे साथ न हो पर हमारे साथ चीन जैसा सशक्त देश खड़ा है, ओर पाकिस्थान जैसा आंतकवादी देश।हिन्दू मुस्लिम को आपस मे लड़ाने का, देश को गुमराह करने का, ये कला और ये तरीका बरसो से हमारा आजमाया हत्यार है, यही हमारा ब्रह्मास्त्र है, जो काभि खाली नहीं जाएगा। देश मे 70 साल से लोगो के दिमाग मे ये जो तोड़ फोड़, मार काट, अफवाओ का जहर हमने भर रखा है, इसे मोदी जैसे की 7 पीढियां को खपना पड़ेगा। ये शरद-राहुल-सोनिया-ममता- माया- केजरीवाल की नीति है। English Agricultural law Sharad Pawar's Nationalist Party and Congress Party had wanted to bring the same agricultural legislation since 2006 across India, and then the Government of Punjab also wanted the same. But the work that we could not do in 10 years in power, O work Modi did for the farmers, in one stroke. This is a historic bill, which will change the economic conditions of the farmer, but we will not allow Modi to get his credit. And our Naseeb is good, like Tiket, Kejriwal, Mamta, the bastards are with us. Even though we could not fool the farmers of the whole of India, but we have got the jobbers of Punjab. So why should we miss this chance? This is seditious politics. The country will go to hell, but we want our families to rule this country for the next 70 years. We have erased the names of patriots like Netaji Subhash Chandra Bose, Chandrashekhar Azhad, Bhagatsingh, Sardar Vallabhbhai Patel, Veer Savarkar from this country, till here we dealt with Mahatma Gandhi in 6 months as soon as he got freedom, and his family. If the erasure is erased, then what is Modi? Just after 2014, the people of India have become more intelligent and patriotic. This is the real problem. But we still do not lose. We can make the son of Balasaheb Thackeray, the lion of the Hindu of Maharashtra, a cow, and if his Shiv Sena is abolished, then BJP is a big deal For 70 years we have accumulated so much money, abroad, that we can break this country in 10 more years. We have never had a difference in the past, how many people kill Pakistan in every state of India, or how much land China occupies. Or Hindus are killed by killing in Kashmir, or the army of the country dies without a bullet proof jacket, or buried in snow on the border, or died in a disaster like Kedarnath, or in a gas scandal in Bhopal, or local The bomb died in the train. We have only one care, just as we and our family ruled for 70 years, similarly our next generations should rule for 700 years. Then millions of farmers would commit suicide for this, or Hindu Muslims would cut each other again. In 1947, similarly, 30 lakh Hindus and Muslims were cut off and killed, but our family did not even get to scratch. This is politics, and the right to rule only and only, we mean, the family of Sharad, Rahul, Mamta, Lalu. This is our birthright, and we will continue to bring it back. In this country even before, the kings and the Nawabs of the Moguls have ruled. Now our family will be on our side even further, because even if the people of India are not with us, but a strong country like China stands with us, and a terrorist country like Pakistan. Of, this art and this method has been our tried killer for years, this is our Brahmastra, which will never be empty. For 70 years in the country, we have kept this poison, destruction, poison of Afwao in the minds of people, it will have to consume 7 generations like Modi. This is the policy of Sharad-Rahul-Sonia-Mamta-Maya-Kejriwal.

सोमवार, 8 फ़रवरी 2021

महाराष्ट्र में मुस्लिम मोगल का राज शुरू हुआ।

*आज महाराष्ट्र शर्मिदा हुआ*

*क्या महाराष्ट्र में मोगलों का राज आगया?*

 नेशनल चैनल पर खबरे दिखाई जा रही है, कोंग्रेस के नेताओ ने , भारत रत्न सचिन तेन्दुलकर ओर लता मंगेशकर के ट्वीट की कंप्लेन  राष्ट्रवादी के गृहमंत्री से की जो शरद पवार के दाहिने हाथ है, ओर उन्होंने इन दोनों भारतरत्न के खिलाफ पुलिस को आदेश दे दिए। और इस आदेश का समर्थन शिवसेना ने भी कर दिया।
अब पोलिस इन दोनों के घर जाएगी, इनके मोबाइल जब्त किए जाएंगे,,, ओर पता नही क्या क्या करे।

 महाराष्ट्र का स्वभिमान, को इतनी बड़ी ठेस आज तक किसीने नही लगाई। 
राजनीति इतने निचले स्तर पर जाएगी शिवसेना, राष्ट्रवादी ओर कोंग्रेस की, किसीने सोचा भी न था।
 लगता है, अब महारष्ट्र में  सच मे निजामशाही / मोगल शाही आ गयी है।

इससे ज्यादा हद तो महाराष्ट्र के शकुनि मामा शरद पवार जी ने कर दी।

*शरद पवार शायद होश में नहीं है...*

अंतर्राष्ट्रीय वेश्याओं मियां खलीफा, रिहाना और अंतर्राष्ट्रीय दलाल थनबर्ग के भारत विरोधी अभियान के खिलाफ *सचिन तेंदुलकर के ट्वीट पर पता नहीं क्यों शरद पवार बहुत आगबबूला हो गया है.?* 

कल शरद पवार ने कहा कि _*"सचिन तेंदुलकर को किसानों के बारे में बोलने के दौरान काफी सावधानी बरतनी चाहिए।"*_  

शरद पवार ने यह भी कहा कि  *‘मैं सचिन तेंदुलकर को सुझाव दूंगा कि उन्हें अन्य क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर बयान देने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।*

सचिन तेंदुलकर को दी गयी शरद पवार की उपरोक्त नसीहत पढ़कर मुझे ध्यान आया कि देश के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में से एक तथा *1983 से 1986, लगातार 4 वर्षों तक ICC की वर्ल्ड रैंकिंग मेँ दुनिया के नंबर एक बल्लेबाज रहे दिलीप वेंगसरकर ने 2011 में जब मुम्बई क्रिकेट एसोसिएशन का अध्यक्ष बनने के लिए चुनाव लड़ा था तो उस समय शरद पवार ने दिलीप वेंगसरकर के खिलाफ महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख को चुनाव में खड़ा कर के दिलीप वेंगसरकर के खिलाफ अपनी पूरी ताक़त झोंक दी थी। परिणामस्वरूप दिलीप वेंगसरकर के बजाय विलासराव देशमुख को मुम्बई क्रिकेट एसोसिएशन का अध्यक्ष चुना गया था।*

2015 में दिलीप वेंगसरकर ने जब दोबारा चुनाव लड़ना चाहा तो उनके खिलाफ शरद पवार ने खुद चुनाव लड़ने के लिए ताल ठोंक दी थी और वेंगसरकर को चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित करा के शरद पवार को बिना चुनाव के ही निर्विरोध अध्यक्ष चुन लिया गया था।
*शरद पवार क्या देश को बताएगा कि क्रिकेट दिलीप वेंगसरकर का क्षेत्र था या उसका और विलास देशमुख का क्षेत्र था.?*

उपरोक्त सवाल केवल इसलिए ताकि जिस कसौटी के अनुसार शरद पवार ने कल सचिन तेंदुलकर को नसीहत दी उसी कसौटी के आधार पर शरद पवार के ढोंग पाखण्ड और धूर्तता की धज्जियां उड़ जाएं।
लेकिन सबसे गम्भीर और संवेदनशील सवाल यह है कि सचिन तेंदुलकर के बयान कि "भारत की संप्रभुता से समझौता नहीं किया जा सकता. बाहरी ताकत दर्शक हो सकते हैं, लेकिन भागीदार नहीं." में किसानों का तो कोई जिक्र तक नहीं है। इस बयान में ऐसा क्या है जो शरद पवार इतनी बुरी तरह तिलमिला गया.? 
शरद पवार शायद भूल गया है कि वो इस देश का रक्षामंत्री रह चुका है जिसका प्रथम दायित्व कर्तव्य देश की सम्प्रभुता को अक्षुण्ण रखना ही है। सचिन तेंदुलकर ने भी अपने बयान में भारत की सम्प्रभुता को अक्षुण्ण रखने की बात को ही कहा है। इस पर शरद पवार इतना आगबबूला क्यों हो गया.? इसीलिए अपनी इस पोस्ट की शुरूआत मैंने यह लिखते हुए की है कि... 

*शरद पवार शायद होश में नहीं है...*

English 

* Maharashtra is ashamed today *

 Did the Moguls rule Maharashtra? 

  The news is shown on the national channel, the leaders of the congress compiled the tweet of Bharat Ratna Sachin Tendulkar and Lata Mangeshkar with the Home Minister of the nationalist who is right hand of Sharad Pawar, and he ordered the police  enquiry against these two Bharatratnas.   And this order was also supported by Shiv Sena. Shamefull.

 Now the police will go to these two houses, their mobiles will be confiscated ,, and do not know what  they will do further,,, it's really insulting all .

  Nobody has ever hurt Maharashtra's self-esteem till today.

 Politics will go to such a low level that the Shiv Sena, the nationalist congress and the Congress, are do such, nonsense.  
no one even think.

  It seems that now Nizamshahi / Mogal Shahi has come to Maharashtra.

 Shakuni maternal uncle of Maharashtra Sharad Pawar did more than this.

 * Sharad Pawar is probably not conscious ... *

 Against the anti-India campaign of international prostitutes Mian Khalifa, Rihanna and international broker Thanberg * Don't know why Sachin Tendulkar's tweet has become so furious. *

 Yesterday Sharad Pawar said that _ * "Sachin Tendulkar should be very careful while speaking about farmers." * _

 Sharad Pawar also said that * "I would suggest to Sachin Tendulkar that he should be cautious before making a statement on issues related to other areas."

 After reading the above edict of Sharad Pawar given to Sachin Tendulkar, I came to notice that Dilip Vengsarkar, one of the best batsmen in the country and * world number one batsman in ICC world rankings for 4 consecutive years from 1983 to 1986, when Mumbai in 2011  When he contested to become the President of the Cricket Association, at that time, Sharad Pawar had put his full power against Dilip Vengsarkar by putting the then Chief Minister of Maharashtra Vilasrao Deshmukh in the election.  As a result, Vilasrao Deshmukh was chosen as the President of Mumbai Cricket Association instead of Dilip Vengsarkar. *

 In 2015, when Dilip Vengsarkar wanted to contest again, Sharad Pawar himself was pitted against him and Vengsarkar was disqualified from contesting elections and Sharad Pawar was elected unopposed.
 * Will Sharad Pawar tell the country that cricket was the territory of Dilip Vengsarkar or his and Vilas Deshmukh's territory. *

 The above question is only so that the criterion according to which Sharad Pawar had instructed Sachin Tendulkar on the basis of the same criterion, flies to the hypocrisy and deceit of Sharad Pawar.
 But the most serious and sensitive question is that Sachin Tendulkar's statement that "India's sovereignty cannot be compromised. External forces can be spectators, but not partners."  There is no mention of farmers in India.  What is it in this statement that Sharad Pawar was so badly stung?
 Sharad Pawar has probably forgotten that he has been the defense minister of this country whose first duty is to keep the sovereignty of the country intact.  Sachin Tendulkar has also said in his statement that the sovereignty of India is intact.  Why did Sharad Pawar get so hot on this?  That's why I started this post by writing that ...

 * Sharad Pawar is probably not conscious ... *

क्या मुस्लिम देशभक्त होते है?*

 *क्या मुस्लिम देशभक्त होते है?* *9 मई काला दिवस जाहिर पाकिस्तान में*  अब हम ऊपर के दोनो मुद्दे को एक दूसरे से जोड़कर निर्णय ले सकते है  194...